पुज्य मुनिवर के मुखारविंद से हुई सुख, समृद्धि च आरोग्यता के लिए शांतिधारा विद्या सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण कर किया दीप प्रज्जवलन

बड़वानी – शहर में विराजित दिगम्बर जैन समाज के संत 108 मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज एवं संघस्थ मुनि संघ के सानिध्य में मंगलवार को दिगम्बर जैन मंदिर में भगवान के अभिषेक और पुज्य मुनिवर के मुखारविंद से सम्पूर्ण विश्व, नगर, देश, प्रदेश की सुख, समृद्धि और आरोग्यता के लिए शांतिधारा कराई गई। जिसमें समाज के युवा और बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शांति धारा का सौभाग्य प्रवीण जैन, जितेंद्र जी गोधा, डॉ चक्रेश पहाडिय़ा और आदिश जैन को मिला। वहीं दोपहर को स्थानीय मांगलिक परिसर में मुनिराज की दिव्य देशना हुई, जिसमें प्रारंभ में परम जगत पुज्य संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण और दीप प्रज्जवलन समाज के वरिष्ठजनों ने किया।
मुनि श्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य जितेंद्र गोधा को मिला और मुनि श्री को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य श्रीमती उषा देवी काला एवं श्रीमती दीपाली काला को प्राप्त हुआ। इसके बाद आचार्य श्री जी की भक्ति और संगीतमयी पुजन कमल संगीतकार बड़वाह के मधुर भजनों से हुई, जिसमें कई समाजजनों ने द्रव्य चढ़ाए। परम पुज्य विनम्र सागर जी महाराज ने कहा कि ग्रहस्थ के 4 ध्यान होते हैं ये चारों ध्यान नरक गति के साधन हैं। ग्रहस्थ 4 प्रकार के आत्र्र और 4 प्रकार के रौद्र ध्यान करता है। मनुष्य आत्र्त ध्यान करता है पर मुनियों वाला ध्यान नहीं करता है। आचार्य कहते हैं ग्रहस्थ का ऐसा स्वरूप है जो पुण्य का फल तो चाहता है पर पुण्य नहीं करता और पाप का फल नहीं चाहता पर पाप करता है। आपको पता है कि गलत क्या है फिर भी गलत करते हैं। सही समझते हो पर सही तरीके से चलना कठिन होता है इसलिए गलत करते हो। सत्य सरलता पैदा नहीं करता झूठ सरलता पैदा करता है। शाम को आचार्य श्री की संगीतमय आरती और गुरूभक्ति की गई। जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद थे।

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