दीपावली पर मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अपील अधिक ध्वनि स्तर जनक पटाखों का निर्माण, विक्रय व उपयोग वर्जित

बड़वानी – प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भोपाल के सदस्य सचिव एए मिश्रा ने परिपत्र के माध्यम से आमजनों को बताते हुए अनुरोध किया है कि दीपावली प्रकाश का पर्व है, लेकिन दीपावली के समय कई तरह के पटाखों का उपयोग बड़ी मात्रा में किया जाता है। ज्वलनशील एवं ध्वनि कारक पटाखों के उपयोग के कारण परिवेशीय वायु में प्रदूषक तत्वों एवं ध्वनि स्तर में वृद्धि होकर पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कुछ पटाखों से उत्पन्न ध्वनि की तीव्रता 100 डेसीबल से भी अधिक होती है। इस तरह के प्रदूषण पर नियंत्रण किया जाना अति आवश्यक है, जिससे मानव अंगों पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। श्री मिश्रा ने बताया कि इस सम्बंध में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना जीएसआर 682(ई) 05.10.1999 में पटाखों के प्रस्फोटन से होने वाले शोर के लिए मानक के अनुसार प्रस्फोटन के बिंदू से 4 मीटर की दूरी पर 125 डीबी (एआई) या 145 डीबी (सी) पीक से अधिक ध्वनि स्तर जनक पटाखों का निर्माण, विक्रय व उपयोग वर्जित है।

सीमित मात्रा में करें पटाखों का उपयोग

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रिट-पिटीशन (सिविल) क्रं. 728/2015 ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के परिप्रेक्ष्य में 23 अक्टूबर 2018 को दिए गए निर्णयानुसार रात 8 से 10 बजे तक (2 घंटे) के बाद दीपावली पर्व पर पटाखों का उपयोग प्रतिबंधित है। श्री मिश्रा ने आम जनता से अनुरोध किया है कि वे पटाखों का उपयोग सीमित मात्रा में करें एवं पटाखों को जलाने के बाद उत्पन्न कचरे को घरेलू कचरे के साथ न रखें। उन्हें अलग रखकर नगर-निगम के कर्मचारियों को सौंप दे। जिससे नगर-निगम एवं नगर पालिका, पटाखों के कचरा को अलग से संग्रहित कर उसका निष्पादन कर सके।

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