उद्यानिकी विभाग के भृष्ट्र अधिकारी और लाक डाउन के कारण प्याज की फसल हो रही बर्बाद – पंचोले भारतीय किसान संघ ।

बड़वानी – बड़वानी जिले के कई गांव में हजारों एकड़ की प्याज की फसल पक कर तैयार है मगर आज ऐसी परिस्थितियां बनी हुई है कि पूरे विश्व में करोना वायरस की महामारी फैली हुई है इसी वजह से पूरे भारत में लाक डाउन किया गया है ऐसे में जैसे तैसे किसानों ने अपने खेतों में से गेहूं की फसल निकाली , कई किसानों को सब्जियां एवं फल फ्रूट खेतों में ही सड़ने देने को मजबूर है इन सभी संकट से उबर नही पाए थे कि प्याज की फसल को लेकर किसानों के सामने संकट खड़ा हो गया , 4 महीने प्याज की फसल को पानी दवाई खाद एवं अन्य खर्च करने के बाद फसल पक कर तैयार हुई तो पूरे देश की मंडियां लाक डाउन के चलते बंद है ऐसी परिस्थिति में अपने खेतों में किसानों को बिना व्यवस्था के कहीं पेड़ों के नीचे तो कहीं खेतों में ही अपनी प्याज की फसल को पटक कर रखना पड़ रहा है जब किसानों ने 10 – 15 दिन बाद फसल को देखने गए तो प्याज फसल खराब होती नजर आ रही है ।

     राजपुर तहसील के कृषक रामलाल कुशवाहा ने बताया कि उनके खेत में करीबन 4 एकड़ में प्याज लगाया था 10 – 12 दिन पहले कटाई करवा ली गई थी मगर लाक डाउन के कारण मंडिया बंद होने से प्याज को अपने खेत में ही भंडारण किया मगर उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण प्याज की फसल का पूरा ढेर सड गया जिसमें करीबन ढाई लाख के लगभग की लागत लगी है , फसल सड़ जाने के कारण बैंकों से लिए कर्ज को चुका पाना मुश्किल नजर आ रहा है ।

    भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष मंशाराम पंचोले ने बताया कि पूरे जिले में प्याज कटाई का काम शुरू हो गया है मगर आज लॉक डाउन के कारण मंडिया बंद पड़ी है एवं किसानों को बारदान भी नहीं मिल रहे हैं किसानों के पास उचित भंडारण करने की व्यवस्था नहीं है जिससे खेतों में ही अपनी प्याज की फसल को रख रखा है जो उचित व्यवस्था न होने से सड़ने लगी है प्याज को लेकर शासन द्वारा छोटे-छोटे कोल्ड स्टोर बनवाए जाते हैं मगर जिले के भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा पैसों के लेनदेन के चक्कर में जहां प्याज की खेती नहीं होती है और केला गन्ना एवं अन्य फसलें बोई जाती है उन्हें प्याज भंडारण की व्यवस्था दी गई और जहाँ प्याज होते है वहा ऐसी कोई सुविधा नही दी गई ऊपर से किसानों को बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का भी डर सता रहा है ।

बहरहाल सरकार ने बैंक कर्ज पर 0% ब्याज और ऋण वापसी के लिए एक माह का समय तो दे दिया लेकिन अगर फसल ही बर्बाद हो गई तो किसान एक माह बाद भी पैसा आखिर लाएगा कहा से ऐसे में देखना यह है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह इस आपदा से किसानों को किस तरह राहत प्रदान करेंगे और भृष्ट अधिकारियों पर कैसे नकेल कसते हुए क्या कार्रवाई करेंगे ।

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